मंगलवार, 14 मार्च 2017

भारत में कृषि का महत्व

1. भारत के कुल क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर खेती होती है ?
►- 51 प्रतिशत

2. भारत में कितने प्रतिशत भाग पर चारागाह है ?
►- 4 प्रतिशत

3. वन से भरी भूमि का प्रतिशत कितना है ?
►- 21 प्रतिशत

4. बंजर भूमि तथा बिना उपयोग की भूमि का प्रतिशत भारत में कितना है ?

►- 24 प्रतिशत

5. नकदी फसल किसे कहते हैं ?
►- वह फसल जो व्यापार के उद्देश्य से किसानों द्वारा की जाती है । जैसे- कपास, गन्ना, तंबाकू, जूट इत्यादि ।

6. रबी की फसल किसे कहते हैं ?
►- यह फसल अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है । मार्च-अप्रैल में काटी जाती है । जैसे- गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों, आलू, राई इत्यादि ।

7. खरीफ की फसल किसे कहते हैं ?
►- यह फसल जून-जुलाई में बोई जाती है और नवंबर-दिसंबर में काट ली जाती है । जैसे- धान, गन्ना, तिलहन, कपास, मक्का, तिल, ज्वार, बाजरा इत्यादि ।

8. जायद फसल का क्या अर्थ है ?
►- यह मई-जून में बोई जाती है और जुलाई-अगस्त में काट ली जाती है । जैसे- राई, उड़द, मूंग, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा इत्यादि ।

9. झूम खेती क्या है ?
►- इसमें जंगलों को काटकर भूमि साफ की जाती है । इसके बाद इस भूमि पर खेती की जाती है । कुछ दिनों बाद भूमि की उर्वरता समाप्त हो जानने पर यह भूमि छोड़ दी जाती है । इस तरह की खेती पूर्वोत्तर के राज्यों में की जाती है ।

7. खरीफ की फसल किसे कहते हैं ?
►- यह फसल जून-जुलाई में बोई जाती है और नवंबर-दिसंबर में काट ली जाती है । जैसे- धान, गन्ना, तिलहन, कपास, मक्का, तिल, ज्वार, बाजरा इत्यादि ।

8. जायद फसल का क्या अर्थ है ?
►- यह मई-जून में बोई जाती है और जुलाई-अगस्त में काट ली जाती है । जैसे- राई, उड़द, मूंग, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा इत्यादि ।

9. झूम खेती क्या है ?
►- इसमें जंगलों को काटकर भूमि साफ की जाती है । इसके बाद इस भूमि पर खेती की जाती है । कुछ दिनों बाद भूमि की उर्वरता समाप्त हो जानने पर यह भूमि छोड़ दी जाती है । इस तरह की खेती पूर्वोत्तर के राज्यों में की जाती है ।

10. देश में कुल कृषि योग्य भूमि के कितने प्रतिशत भाग पर गेहूं की खेती की जाती है ?
►- 15 प्रतिशत

11. हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव किस फसल पर पड़ा ?
►- चावल और गेहूं ।

12. भारत में हरित क्रांति लाने का श्रेय किन्हें जाता है ?
►- डॉ. एम एस स्वामीनाथन

13. भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई थी ?
►- 1967-1968 ई. ।

14. तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन की स्थापना कब हुई ?
►- 1986 ई.

15. भारत यूरिया के मामले में कितना आत्मनिर्भर है ?
►- 100 प्रतिशत

16. 10. देश में कुल कृषि योग्य भूमि के कितने प्रतिशत भाग पर गेहूं की खेती की जाती है ?
►- 15 प्रतिशत

17. केसर का एकमात्र उत्पादक राज्य कौन है ?
►- जम्मू-कश्मीर

18. भारत में सबसे अधिक रेशम कहां पैदा होता है ?
►- कर्नाटक

19. प्राकृतिक रबड़ में भारत का कौन-सा अव्वल है ?

►- केरल (विश्व में चौथा स्थान)
20. नासिक किसकी खेती के लिए प्रसिद्ध है ?
►- अंगूर

21. काफी के उत्पादन के लिए भारत में कौन-सी जगह प्रसिद्ध है ?
►- कुर्ग (नीलगिरी की पहाड़ी)

22. राष्ट्रीय रसदार फल अनुसंधान केंद्र कहां स्थित है ?
►- नागपुर

23. सबसे अधिक तंबाकू उत्पादित करने वाले राज्य कौन-से हैं ?
►- आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु
24. विश्व में किसके उत्पादन में भारत का स्थान पहला है ?
►- आम, चीकू, खट्टा नींबू, केला, नारियल, काली मिर्च, अदरक, हल्दी ।

25. सब्जियों और फलों के उत्पादने में विश्व में भारत का कौन-सा स्थान है ?
►- भारत (पहला स्थान चीन का है।)

26. विश्व में चावल के उत्पादन में चीन के बाद किस देश का स्थान है ?
►- भारत

27. कृषि --------------------विधियों के नाम
►-
सेरीकल्चर---------------रेशमकीट पालन
एपिकल्चर---------------मधुमक्खी पालन
पिसीकल्चर---------------मत्स्य पालन
फ्लोरीकल्चर---------------फूलों का उत्पादन
विटीकल्चर---------------अंगूर की खेती
वर्मीकल्चर---------------केंचुआ पालन
पोमोकल्चर---------------फलों का उत्पादन
ओलेरीकल्चर---------------सब्जियों का उत्पादन
हॉर्टीकल्चर---------------बागवानी
एरोपोर्टिक---------------हवा में पौधे को उगाना
हाइड्रोपोनिक्स---------------पानी में पौधों को उगाना

28. कृषि क्रांतियां
►-
हरित क्रांति---------------खाद्यान्न उत्पादन
श्वेत क्रांति---------------दुग्ध उत्पादन
नीली क्रांति---------------मत्स्य उत्पादन
भूरी क्रांति---------------उर्वरक उत्पादन
रजत क्रांति---------------अंडा उत्पादन
पीली क्रांति---------------तिलहन उत्पादन
कृष्ण क्रांति---------------बायोडीजल उत्पादन
लाल क्रांति---------------टमाटर/मांस उत्पादन
गुलाबी क्रांति---------------झींगा मछली उत्पादन
बादामी क्रांति---------------मासाला उत्पादन
सुनहरी क्रांति---------------फल उत्पादन
अमृत क्रांति---------------नदी जोड़ो परियोजनाएं

29. फसल --------और उत्पादक राज्य
►-
चावल---------------प. बंगाल, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, बिहार और पंजाब

गेहूं---------------उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान

ज्वार---------------महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश

दलहन---------------मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, प. बंगाल, गुजरात और आंध्रप्रदेश

बाजरा---------------गुजरात, राजस्थान और उत्तरप्रदेश

जौ---------------उत्तर प्रदेश

30. हरित क्रांति का जनक किसे कहते है?
►- डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन

              भारत में कृषि – सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

● भारत में कुल क्षेत्रफल का कितनें% भाग शु बोया गया क्षेत्र है— 47% 

● भारत की कृषि सब
से अधिक किस पर निर्भर होती है— वर्षा पर 

● जो फसल अक्टूबर में बोई जाती है और अप्रैल में काट ली जाती है, वह क्या कहलाती है— रबी की फसल 

● जो फसल जुलाई में बोई जाती है और अक्टूबर में काटी जाती है, वह कौन-सी फसल होती है— खरीफ की फसल 

● जो फसल रबी और खरीफ की फसल के बीच तैयार की जाती है, वह कौन-सी है— जायद की फसल 

● खरीफ की फसल कौन-कौन-सी हैं— ज्वार, बाजरा, मक्का, चावल, तिल आदि 

● रबी की फसल कौन-कौन सी हैं— गेहूँ, चना, जौ, मटर, सरसों, आलू आदि 

● जायद की फसल कौन-कौन सी हैं— खरबूजा, ककड़ी खीरा आदि

● नगदी की फसल कौन-कौन सी हैं— चावल 

● किस क्षेत्र को ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है— कृष्णा और गोदावरी के क्षेत्र को 

● भारत का सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पनन करने वाला राज्य कौन-सा है— उत्तर प्रदेश

 
● भारत में सबसे अधिक कौन-सी फसल उगाई जाती है— धान 

● हरित क्रान्ति की शुरुआत कब हुयी थी-  1967-68 ई. 

● हरित क्रांति का जनक किसे माना जाता है— डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन 

● हरित क्रांति का प्रमुख उद्देश्य क्या था— खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाना

● हरित क्रांति किस फसल पर सबसे अधिक उपयोगी रही— गेहूँ व चावल 

● किस राज्य को ‘भारत का धान्य भंडार’ कहा जाता है— पंजाब 

● सब्जी उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है— द्वितीय 

● फल उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है— द्वितीय 

● ‘नाली क्रांति’ का संबंध किस उद्योग से है— मत्स्य उद्योग से 

● ‘श्वेत क्रांति’ का संबंध किस उद्योग से है— दुग्ध उत्पादन से 

● ‘सुनहरी क्रांति’ किस फसल से संबंध रखती है— बागवानी व शहद उत्पादन से 

● ‘गोल क्रांति’ किसके लिए चलाई गई— आलू उत्पादन के लिए

● कौन-सी क्रांति से संबंधित नहीं है— कृष्णा क्रांति 

● गुलाबी क्रांति किससे संबंधित है— झींगा उत्पादन 

● भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का कितने % भाग कृषि में लगा हुआ है— 64.5%

● नीलगिरि के पहाड़ी क्षेत्रों में कौन-सी फसल उगाई जाती है—कॉफी 

● राष्ट्रीय रसदार फल अनुसंधान केंद्र कहाँ है— नागपुर 

● अंगूरों की खेती के लिए कौन-सा शहर प्रसिद्ध है— नासिक 

● मूंगफली भारत में सबसे अधिक किस राज्य में उगाई जाती है—गुजरात में 

● चावल का उत्पादन सर्वाधिक किस राज्य में होता है— पश्चिमी बंगाल 

● भारत के किस राज्य में गेहूँ की खेती नहीं होती है—तमिलनाडु 

● किस फसल की कटाई व बुवाई में सबसे अधिक समय लगता है— गन्ना 

● तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन की स्थापना कब हुई— 1986 में 

● भारत का उर्वरक उत्पादन में विश्व में कौन-सा स्थान है— तीसरा 

● वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व संब क्षेत्र का योगदान कितना है— 13.67%

● मूँगफली में दाने का औसत % कितना होता है— 70% 

● केंद्रीय शुष्क भूमि खेती अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है—हैदराबाद 

● मक्का की खेती किस मौसम में की जाती है— खरीफ के मौसम में 

● दुग्ध उत्पादन में श्वेत क्रांति लाने का श्रेय किसे जाता है— डॉ. वर्गीज कुरियन

● दुग्ध उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है— प्रथम 

● भारत में सर्वोत्तम चाय कहाँ पैदा की जाती है— दार्जिलिंग 

● किस फसल के लिए पानी की अधिकता आवश्यक है किन्तु जमाव नहीं— चाय 

● काजू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है— केरल 

● रेशे वाली फसलें कौन-सी होती हैं— कपास, जूट, सन आदि

● भारत में लंबे रेशे के कपास का आयात मुख्यतः कहाँ से होता है— संयुक्त राज्य अमेरिका 

● दलहन उत्पादन में भारत का कौन-सा राज्य सबसे आकगे है—राजस्थान 

● स्वच्छ जलीय मछली का उत्पादन करने वाला राज्य कौन-सा है— पं. बंगाल 

● तंबाकू उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा राज्य करता है—तीसरा 

● भारत के जूट का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला राज्य कौन-सा है—पश्चिमी बंगाल 

● भारत का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य कौन-सा है—मध्य प्रदेश 

● नारियल उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है—प्रथम 

● हरित क्रांति के फलस्वरूप देश में कुल खाद्यान्न में किसकी उत्पादकता में कमी आई— दलहन एवं मोटा अनाज 

● शुष्क भूमि के लिए सबसे अच्छी फसल कौन-सी है— मूंगफली

● झूम क्या है— कृषि का एक तरीका 

● बड़े पैमाने पर जूट की खेती किस नदी क्षेत्र में की जाती है— हुगली नदी क्षेत्र में 

● केसर सबसे अधिक मात्रा में कहाँ होता है— कश्मीर में 

● कृषि को उद्योग का दर्जा देने वाला प्रथम राज्य कौन-सा है— महाराष्ट्र 

● किस समिति ने कृषि जोतों पर कर लगाने की संस्तुति की—राज समिति ने 

हाईब्रेड बैंगन की खेती

बैगन का वानस्पतिक नाम - सोलेनम मेलोन्जीना

कुल- सोलेनेसी 



नमस्कार दोस्तो फिर से हाजिर हूं एक नई खेती के साथ जिसका नाम है बैंगन की खेती ! तो शुरू करते है - 

बैंगन एक पौष्टिक सब्जी है। इसमें विटामिन ए एवं बी के अलावा कैल्शियम, फ़ॉस्फ़रस तथा लोहे जैसे खनीज भी होते है। यदि इसकी उपयुक्त उत्तम क़िस्में तथा संकर किंस्में बोई जाए और उन्नत वैज्ञानिक सस्य क्रियाएं अपनाई जाएं तो इसकी फ़सल से काफ़ी अधिक उपज मिल सकती है। 

बैंगन की क़िस्में 

पूसा हाईब्रिड -5 

पौधे की अच्छी बढ़वार तथा शाखाएँ ऊपर को उठी हुई होती है, फल मध्यम लम्बाई के, चमकदार तथा गहरे बैंगनी रंग के होते है। बुआई से पहली तुड़ाई में 85- 90 दिन लगते है। उत्तरी तथा मध्य भारत के मैदानी क्षेत्रों तथा समुद्र तट को छोड़ कर कर्नाटक, केरल, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु क्षेत्र के लिये उपयुक्त है। उपज 450 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है। 

पूसा हाईब्रिड-6 

पौधे मध्यम सीधे खडे रहने वाले होते हैं। फल गोल, चमकदार, आकर्षक बैंगनी रंग के होते है, प्रत्येक फल का वजन लगभग 200 ग्राम होता है। बुआई से पहली गुड़ाई में 85-90 दिन लगते है। उपज 400-600 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होती है। 

पूसा हाईब्रिड 9 

पौधे सीधे खडे रहने वाले होते हैं। फल अण्डाकार गोल, चमकदार बैंगनी रंग के होते हैं। प्रत्येक फल का वजन लगभग 300 ग्राम होता है । बुआई के पहली तुडाई में 85-90 दिन लगते है । गुजरात तथा महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए उपयुक्त है । इसकी औसत उपज 500 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है। 

पूसा क्रान्ति 

इस क़िस्म के फल गहरे बैंगनी रंग के मध्यम लम्बाई के होते है । यह क़िस्म बसन्त तथा सर्दी दोनों मौसमों के लिये उपयुक्त पाई गई है । इसकी औसत उपज 300 किंवटल प्रति हेक्टेअर है। 

पूसा भैरव 

इसके फल गहरे बैंगनी रंग के थोड़े मोटे व कुछ लम्बे होते है । यह क़िस्म फल-गलन रोग प्रतिरोधी है। 

पूसा पर्पल कलस्टर 

पौधें सीधे खडे रहने वाले होते है। पत्तियाँ रगंदार होती है। फल 9 से 12 सें०मी० लम्बे तथा गुच्छे में लगते है। यह क़िस्म पहाडी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। यह क़िस्म फल तथा तना छेदक, जीवाणु तथा उकटा रोग के लिए कुछ रोधक है। 
पूसा अनुपम पौधे मध्यम तथा सीधे होते हैं। फल पतले, बैगनी रंग के होते हैं। फल गुच्छे में लगते है। यह क़िस्म उकठा रोग प्रतिरोधी है। 

पूसा बिन्दु 

इस क़िस्म के बैंगन छोटे,गोल और चमकदार होते हैं । जिनका रंग गहरा बैंगनी डंठल चित्तीदार होता है । यह क़िस्म 90 दिन में तैयार हो जाती है । औसत उपज 300 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है । यह क़िस्म उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिये उपयुक्त है। 

पूसा उत्तम 31 

इसके फल अण्डाकार गोल चमकदार, गहरे बैंगनी रंग और मझौले आकार के होते हैं । बुआई से पहली तुड़ाई में 85-90 दिन लगते हैं। औसत उपज 425 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है । यह क़िस्म उत्तरी मैदानी तथा पश्चिमी क्षेत्रों के लिये उपयुक्त है । 

पूसा उपकार 

इसके फल गोल चमकदार, गहरे बैंगनी रंग और मझौले आकार के होते हैं। फल का औसत वजन 200 ग्राम होता है । पहली तुडाई फसल बोने के 85 दिन बाद की जा सकती है । यह क़िस्म उत्तरी मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है । इसकी औसत उपज 400 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है । 

पूसा अंकुर 

यह एक अगेती क़िस्म है जो बुआई की तारीख से 75 दिनों में फल तोडने के लायक हो जाते हैं । फल छोटे, गहरे बैंगनी , अण्डाकार गोल चमकीले होते हैं । इसकी औसत उपज 350 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है ।

नर्सरी 

इसके बीज उठी हुई क्यारियों में लगभग 1 सें०मी० की गहराई पर 5 से 7 सें०मी० के फासलों पर बनी कतारों में बोने चाहिएँ। एक हेक्टेअर क्षेत्र में रोपाई के लिये लगभग 400 ग्राम बीज पर्याप्त है। संकर क़िस्मों के बीज की मात्रा 250 ग्राम पर्याप्त रहती है। भारी आकार वाली क़िस्मों के लिये पंक्ति से पंक्ति की दूरी 70 सें०मी० तथा पौधों से पौधों की दूरी 60 सें०मी० रखी जाती है। छोटे आकार वाली क़िस्मों के लिये पंक्ति से पंक्ति तथा पौधे से पौधे की दूरी का फासला 60 x 60 या 60x 45 सें०मी० रखा जा सकता है। 

बुआई 

शरद फसल 

इस फसल के बीज मई-जून में बोए जाते हैं और पौध रोपाई जून के अन्त से जुलाई के मध्य तक की जा सकती है। 

बसंत-ग्रीष्म 

इस फसल के बीज नवम्बर के मध्य में बोये जाते हैं और पौध जनवरी के अन्त में तब रोपी जाती है, जब पाले का भय समाप्त हो जाता है। 

वषा ऋतु 

इस फसल के बीज फरवरी- मार्च के महीनों में बोए जाते हैं और पौध की रोपाई मार्च-अप्रैल के महीनों में की जाती है। 

खाद और उर्वरक 

खाद व उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर की गई सिफारिश के अनुसार रखनी चाहिए। जहां मिट्टी की जांच न की हो खेत तैयार करते समय 25-30 टन गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। इसके साथ-साथ 200 किलो ग्राम यूरिया, 370 किलो ग्राम सुपर फ़ॉस्फ़ेट और 100 किलो ग्राम पोटेशियम सल्फ़ेट का इस्तेमाल करना चाहिए। यूरिया की एक तिहाई मात्रा और सुपरफ़ॉस्फ़ेट तथा पौटेशियम सल्फ़ेट की पूरी मात्रा खेत में आखिरी बार तैयारी करते समय इस्तेमाल की जानी चाहिए। बची यूरिया की मात्रा को दो बराबर खुराकों में देना चाहिए। पहली खुराक पौधे की रोपाई के 3 सप्ताह बाद दी जाती है जबकि दूसरी मात्रा पहली मात्रा देने के चार सप्ताह बाद दी जानी चाहिए। 

पौध संरक्षण 

रोपाई के 2 सप्ताह बाद मोनोक्रोटोफास 0.04 % घोल, 15 मि०ली० प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। 

प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें ज़मीन में गाढ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रति दिन करते रहे। 

मोनोक्रोटोफोस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मि०ली० प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। डेसिस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान-2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल पेराथियोन -2 मि०ली० प्रति लीटर पानी का छिड़काव करे। अगर जैसिड की समस्या हो तो मिथाइल पेराथियोन का छिड़काव फिर से करें लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिड़कने से पहले फलों को तोड़ लें। 

प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें जमीन में गाड़ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रतिदिन करते रहें। 

मोनोक्रोटोफोस के छिड काव के 3 सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मि. ली. प्रति लीटर पानी का छिडकाव करें। डेसिस के छिडकाव के 3 सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान - 2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल परथिओन-2 मि. ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करे। यदि जैसिड की समस्या हो तो मिथाइल पेराथियोन का छिडकाव फिर से करें लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिडकने से पहले फलों को तोड लें। 

 

कृषि सम्बन्धी कृषि विज्ञान की शाखाएं

1.हॉर्टिकल्चर-
फल-फूल एवं सब्जियों का अध्ययन

2. ओलेरीकल्चर -
सब्जियों की कृषि का अध्ययन

3. फ्लोरीकल्चर -
फूलों की कृषि का अध्ययन

4. पिसीकल्चर- व्यापारिक मत्स्य पालन का अध्ययन

5. एपीकल्चर - मधुमक्खी पालन का अध्ययन

6. मेरीकल्चर- समुद्री जीवों की उत्पादन संबधित अध्ययन

7. सिल्वीकल्चर- वन कृषि का अध्ययन

8. सेरीकल्चर- सिल्क (रेशम) का उत्पादन संबधित अध्ययन

9. आरबोरीकल्चर - वृक्षों तथा झाड़ियों का अध्ययन

10. पोमोलॉजी - फलों का अध्ययन

11. ओल्वीकल्चर- जैतून की कृषि सम्बंधित अध्ययन

12. विटीकल्चर - अंगूर की खेती संबधित अध्ययन

13. साइट्रिकल्चर-  नींबू वर्ग से सम्बन्धी फलों की खेती का अध्ययन

एक नजर कृषि की तरह(Agriculture at a glance )

किसको क्या कहते है-

1. शुष्क क्षेत्रों के फलों का राजा - बेर

2. शीतोष्ण क्षेत्रों के फलों का राजा - सेब

3.जंगल का राजा- टीक

4. दालों का राजा - चना

5. फूलों की रानी - योलस

6. फलों की रानी- लीची

7. फूलों  का राजा - गुलाब

8. दूध  की रानी - सानेन बकरी

9. मसालों  की  रानी - इलायची

10. पेय पदार्थो  की  रानी - चाय

11. दालो़  की  रानी - मटर

12. एडम फिग - केला

13. मक्खन का प्याला- फाइकस किसनी

14.फब्बारा वृक्ष - स्पेथोड़िया केम्पेकुलेता

15. मक्खन फल- वोकेडो

16. गरीबो का फल - बेर

17. ईश्वरीय फल ( चमत्कारिक फल) - कीवी फल

18. कल्प वृक्ष - नारियल

19. फाल्स गोल्ड - पाइराइट

20. शताब्दी वृक्ष - खजूर

21. हरा सोना- अफीम

22. ईश्वर का भोजन - कोको

23. बेजेटेबल मीट - लोविया

24. हड्डी रहित मॉस - सोयाबीन

25. सबसे छोटा पुष्प - वोल्फिया(0.1मिमी)

26. सबसे छोटा गुणसूत्र - एल्गी

27. सबसे छोटा बीज- आर्किड

28. सबसे सख्त लकड़ी - हार्डविकिया

29. सबसे भारी लकड़ी - ओलिया लोरिफ लोइया

30. सबसे छोटी कोशिका - माइकोप्लाज्मा गेलिसेप्टिकम

31. विश्व का सबसे बड़ा कीट - मेगास्टिक

32. चमत्कारिक पेड़ - नीम

33. चमत्कारिक फसल - सोयाबीन

34.सुनहरा रेशा - जूट

35. मसलों का राजा - काली मिर्च

36. जैव ऊर्जा पौधा  - जैट्रोफा

37. खरपतवारों का राजा - कांग्रेस घास

38. स्वर्ग का पेड़ - नारियल

39. जैव निकास पौधा - यूकेलिप्टस स्पे.

40. फसलों की ड्रोसोफिला - मक्का

41. ऊंट फसल - ज्वार

42. लकड़ी शर्करा- जइलोस

पोषक तत्वों का पौधों की आवश्यकतानुसार वर्गीकरण -

पौधें जड़ो के द्वारा भूमि से पानी एवं पोषक तत्व तथा वायु से कार्बन डाइआक्साइड तथा सूर्य से प्रकाश व ऊर्जा लेकर अपने विभिन्न भागों का निर्माण करते है !

●पोषक तत्वों को पौधों की आवश्यकतानुसार निम्न प्रकार वर्गीकृत किया गया है -

1. मुख्य पोषक तत्व - नाइट्रोजन , फास्फोरस तथा पोटाश

2.गौण पोषक तत्व  - कैल्शियम , मैग्नीशियम
एवं गंन्धक !

3.सूक्ष्म.पोषक तत्व  - लोहा , जिंक , कॉपर , मैग्नीज , मलिब्डेनम , बोरॉन एवं क्लोरीन इत्यादि !

●पौधों में आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके कार्य  -

(1) पौधे के सामान्य विकास एवं वृद्धि हेतु 16 केवल पोषक तत्व की आवश्यकता पड़ती है इनमें से किसी भी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भरपूर उपज नहीं मिल पाती है

(2) कार्बन हाइड्रोजन व ऑक्सीजन को पौधे हवा एवं जल से प्राप्त करते है!

(3) नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम को को देख मिट्टी से प्राप्त करते हैं इनकी पौधों को काफी मात्रा में जरूरत पड़ती है इन्हें प्रमुख पोषक तत्व कहते हैं नंबर 4 कैल्शियम मैग्नीशियम एवं गंधक को पहुंचे कम मात्रा में ग्रहण करते हैं इन्हें गोड्या दुतीय पोषक तत्व कहते हैं

(5) लोहा जस्ता मैंगनीज़ दावा बोरान मोलिब्डेनम और क्लोरीन पत्तों की पौधों को काफी मात्रा में आवश्यकता पड़ता है इन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं

● पोषक तत्वों के कार्य-

1. Nitrogen(नाइट्रोजन)- ★ सभी जीवित उतकों को यानी जड़ ,तना,  पत्ती की वृद्धि और विकास में सहायक हैं!

★क्लोरोफिल प्रोटोजोवा प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों का महत्वपूर्ण अवयव है

★पत्ती वाली सब्जियों और चारे की गुणवत्ता में सुधार करता है

2. फास्फोरस -
★ पौधों के वर्धन शील अग्रभाग बीज और फलों के विकास हेतु आवश्यक है !
★ कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है! ★जड़ो के विकास में सहायक होता है न्यूक्लिक अम्लों ,प्रोटीन फास्फोलिफिड और सहविकारों   का अवयव है!
★ अमीनो अम्लों का अवयव है

3. Potassium(पोटैशियम)-

◆ एंजाइमों की क्रियाशीलता बढ़ती है ठंडे और बादल युक्त मौसम में पौधों द्वारा प्रकाश प्रयोग में वृद्धि करता है जिससे पौधों में ठंडक और अन्य  प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता बढ़ जाती है!

◆ कार्बोहाइड्रेट स्थांतरण प्रोटीन संश्लेषण और इनकी स्थिरता  बनाए रखने में मदद करता है!

■ पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि होती है इसके उपयोग से दाने आकार में बड़े हो जाते हैं!
◆ फलों और सब्जियों में गुणवत्ता में वृद्धि होती है !

4. कैल्शियम -
◆कोशिका भित्ति का एक प्रमुख अवयव है जो कि सामान्य कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक होता है !

◆कोशिका झिल्ली की स्थितरता बनाए रखने में सहायक होता है !
इन एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है!

◆ पौधों में जैविक अम्लों  को उदासीन बनाकर उनके विषाक्त प्रभाव को समाप्त करता है!

● कार्बोहाइड्रेट के स्थांतरण में मदद करता है!

5. मैग्नीशियम -
★क्लोरोफिल का प्रमुख तत्व है जिसके बिना प्रकाश संश्लेषण (भोजन निर्माण ) संभव नहीं है !

★कार्बोहाइड्रेट्स उपाचय न्यूक्लिक अम्लों के संश्लेषण आदि  में भाग लेने वाले ने एंजाइम  कि क्रियाशीलता में वृद्धि करता है !

फास्फोरस के अवशोषण और स्थांतरण में वृद्धि करता है !

6. गंधक -
★ प्रोटीन संरचना को स्थिर बनाए रखने में सहायता करता है!
★ तेल संश्लेषण और क्लोरोफिल निर्माण में मदद करता है !

विटामिन के उपायचय  क्रिया में योगदान करता है !

7.जस्ता  -
★पौधों द्वारा फास्फोरस और नाइट्रोजन के उपयोग में सहायक होता है !न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन संश्लेषण में मदद करता है !

★हार्मोन के जैव संश्लेषण में योगदान करता है !
अनेक प्रकार के खनिज एंजाइमों  आवश्यक अंग है !

8.तावा  - पौधों में विटामिन ए  के निर्माण में वृद्धि करता है लेकिन अनेक एंजाइम घटक  हैं !

9. लोहा  - पौधों में क्लोरोफिल के संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है ! न्यूक्लिक अम्ल के उपाचय एक आवश्यक भूमिका निभाता है!
तथा अनेक एंजाइमो का अवयव है!

10.मैगनीज  - प्रकाश और अधेरे की अवस्था में पादप कोशिकाओं में होने वाली क्रियाओं में होने वाली क्रियाओं को नियंत्रित करता है !
नाइट्रोजन के उपाचय और क्लोरोफिल के संश्लेषण में भाग लेने वाले एंजाइमों की क्रियाशीलता बढ़ा देता है तथा पौधों में होने वाली अनेक महत्वपूर्ण एंजाइम युक्त और कोशिकीय प्रतिक्रियाओं के संचालन में सहायक है!  कार्बोहाइड्रेट के आक्सीकरण के फलस्वरुप कार्बन ऑक्साइड जल का निर्माण करता है!

11. बोरोन  - प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक है कोशिका विभाजन को  प्रभावित करता है ! कैल्शियम के अवशोषण और पौधों द्वारा उसके उपयोग को प्रभावित करता है कोशिका  झिल्ली की पारगम्यता  को  बढ़ाता है फलस्वरुप कार्बोहाइड्रेट के स्थानांतरण में मदद मिलती  है ! एंजाइमों की क्रियाशीलता में परिवर्तन लाता है

12. मोलिब्डेनम - कई एंजाइमों का अवयव है! और नाइट्रोजन उपयोग और नाइट्रोजन यौगिकीकरण में मदद करता है! हाइड्रोजन यौगिकीकरण में राइजोबियम जीवाणु के लिए आवश्यक होता है  !

13.क्लोरीन  - क्लोरीन पादप हार्मोन ओ का अवयव है बीजों में यह इण्डोलएसिटक  एसिड का स्थान ग्रहण कर लेता है एंजाइमों की क्रियाशीलता में वृद्धि करता है कवको और जीवाणुओं में पाए जाने वाले अनेक यौगिकों का अवयव.है! पौधों के सर्वाधिक वृद्धि के लिए उपयुक्त सभी पोषक तत्व किया उपलब्धता आवश्यक होती है!

कृषि के अन्तर्गत आने वाले सभी पेड़ - पौधों के वानस्पतिक नाम

1. टमाटर - लाइकोपर्सिकम  एस्कुलेन्टम

कुल- सोलेनेसी

2. बैगन - सोलेनम मेलोन्जीना
कुल- सोलेनेसी

3.मिर्च - कैप्सिकम स्पेशीज
कुल- सोलेनेसी

4.फूलगोभी- ब्रेसिका ओलेरेसिया व्रोट्राइटिस
कुल - क्रूसीफेरी या ब्रेसीकेसी

5.बन्दगोभी - ब्रेसिका ओलेरेसिया कैपीटाटा
कुल- क्रूसीफेरी

6.गॉठगोभी- ब्रेसिका ओलेरेसिया
कुल - क्रूसीफेरी

7.भिण्डी - अवेलमोस्कस एस्कुलेन्टस
कुल - मालवेसी

8.प्याज - एलिएम सैपा
कुल - लिलिएसी

9.लहसुन - एलियम सेटाइवम
कुल - ऐमरलिडेसी

10.गाजर - डौकस कैरोटा
कुल- अमवैलीफेरी

11.मूली -  रेफेनस सैटाइवस
कुल - क्रूसीफेरी

12.शलजम - ब्रेसिका रैपा
कुल- क्रूसीफेरी

13. चुकन्दर - बीटा बुल्गेरिस
कुल - चीनोपोडियेसी

14.मटर - पाइसम सेटाइवम
कुल - लेग्यूमिनेसी या फेबेसी

15. ग्वार - साइमोप्सिस
कुल - लेग्यूमिनेसी

16.सेम - डॉलीकस लवलव
कुल - लेग्यूमिनेसी

17.लोबिया - विग्ना अनग्यूकूलेटा
कुल - लेग्यूमिनेसी

18.पालक - बीटा बलोरिस
कुल - लेग्यूमिनेसी

19.मैथी - ट्राइगोनेला फीनस
कुल - लेग्यूमिनेसी

20.चौलाई - एमरेन्थस
कुल - एमरेन्थसी

21.राजमा या फ्रेन्चबीन - फेलियोलस बुल्गेरिस
कुल - लेग्यूमिनेसी

22.लौकी - लेजीनेरिया सिसनेरिया
कुल - कुकुरबिटेसी

23.तोरई - लूफा एक्येगुला
कुल- कुकुरबिटेसी

24.कद्दू - कुकुरबिटा मौसचेटा
कुल- कुकुरबिटेसी

25.करेला - मेमोर्डिका चेरेंटिका
कुल - कुकुरबिटेसी

26.तरबूज - सिदलस लेनेटस
कुल- कुकुबिटेसी

27. खरबूज - कुकुमिस मेलो
कुल - कुकुरबिटेसी

28. टिन्डा  - सिटलस लेटेनस
कुल - कुकुरबिटेसी

29.ककड़ी - कुकुबिटा मीली युटीलिसियम
कुल- कुकुरबिटेसी

30.खीरा - कुकुरबिटा सेटाइवस
कुल - कुकुरबिटेसी

31.शकरकन्द - आईपोमिया बटाटा
कुल - कौनवोलवुलेसी

32.आलू - सोलेनम ट्यूबरोसम
कुल - सोलेनेसी

33.आम - मेन्जीफेरा इंडिका
कुल - एनाकार्डिएसी

34.अमरूद - साइडियम ग्वाजावा
कुल- मायरटेसी

35.ऑवला - एमब्लिका ऑफीसिनेलिस
कुल -यूफोरविएसी

36.नीबू - सिट्रसओ रेन्टीफोलिया
कुल - रूटेसी

37.अंगूर - विटिस विनीफैरा
कुल - बिटेसी

38.पपीता - कैरीका पपाया
कुल - कैरीकेसी

39.बेर - जिजिफस जुजुबा अथवा जिजिफस मौरीटियाना
कुल - रैमनेसी

40.बेल - एजिल मारमेलोज
कुल - रूटेसी

41.केला - मूसा पैराडाइसिएका
म्यूजेसी

42.हल्दी - कुरकुमा लौगा
कुल  - जिन्जिबेरेसी

43.अदरक - जिन्जीबर ऑफिसिनेल
कुल - जिन्जिबेरेसी

44.हींग - फेरूला ऐसाफोइटिडा
कुल - एपिऐसी

45.पुदीना - मेन्था पिपरेटा
कुल - लेमिऐसी

46.लौग - साइजियम एरोमेटिकम्
कुल - मिरटेसी

47.इलाइची - इलिटेरिया कोडेर्मोमम
कुल - जिन्जिबिरेसी

48.धानियां - कोरिन्ड्रम सेटाइवस
कुल-एपिऐसी

49.सौंफ - फोनीकुल्म वल्गर
कुल - एपिएसी

50.जीरा - क्युमिनस् सायमिनस
कुल - एपीएसी

51.केसर - क्रोकस सेटाइवस
कुल -इरिडेसी

52.जामुन - शायजियम क्यूमिनी
कुल - मिरटेसी

53.तरबूज - सिर्टुँलस लेटेनस
कुल - कुकुरबिटेसी

54.सेब - पाइरस मैलस
कुल - रोजेसी

55.नाशपाती - पाइरस पाइरिफोलिया
कुल - रोजेसी(Rosaceae)

56.शहतूत - मोरस् एल्बा
कुल- मोरेसी

57.पीपल - पाइपर लौगंम
कुल - मोरेसी

58.नारियल - कोकोस न्यूसीफेरा
कुल - एरिकेसी

59.चाय - केमेलिया साइनेसिस
कुल - थिऐसी

60.कॉफी - कॉफिया अरेबिका
कुल - रूबिऐसी

61.सनाय - केसिया आंगीटफोलिया
कुल -

62.सर्पगंन्धा - रौवांल्फिया सपेर टाइना
कुल - एपोसाइनेसी

63.अश्वगंन्धा - विथेनिया सोमनीफेरा
कुल - सोलेनेसी

64.कुनैन - सिनकोना केलीसाया
कुल - रूबिएसी

65.मौलसरी - माइम् सोप्स इलंगी
कुल - सेपोटेसी

66.सिंघाड़ा - ट्रापा नाटांस
कुल - लाइथ्रेसी

67.कमल - निलम्वो न्यूसीफेरा
कुल - निलम्वोनेसी

68.अशोक - सारेका इण्डिका
कुल - सीजलपीनिएसी

69.अर्जुन - टरमीनेलिया अर्जुन
कुल - कोम्ब्रीटेसी

70.घीक्वार - एलोय बारबिडेसिस
कुल - लिलिएसी

71.अमलतास - केसिआ फिटूला
कुल - सीजलपीनिएसी

72.ब्रायोफीलम - ब्रायोफिलम पिन्नेटम
कुल - क्रेसुलेसी

73.कंघी - एब्यूटीलोन इण्डीकम्
कुल - मालवेसी

74.सदाबहार - केथेरेन्थस रोजियम
कुल - एपोसाइनेसी

75.चिरचिटा - एकारेन्थस एस्पेरा
कुल - एमेरेन्थेसी

76.अरण्ड - रिसिनस कोम्यूनस
कुल -यूफोरबियेसी

77.पान - पाइपर बेटल
कुल - पाइपेरेसी

78.आक - कलोट्रोपिस प्रोसेरा
कुल - एसक्लीपिएडेसी

79.यूकेलिप्टस- यूकेलिप्टस गलोब्यूलस
कुल - माइरटेसी

80.गन्ना - सेकेरम् ऑफीसीनेरम
कुल - ग्रेमिनी या पोयसी

81.सूरजमुखी - हेलीऐन्थस एनस
कुल - एस्टरेसी (Asteraceae)

82.चना - सिसर एरिटिनम
कुल - लेग्यूमिनेसी (Leguminaseae)

83. मूंगफली - अरैकिस हाईपोजिया
कुल - लेग्यूमिनेसी

84.सोयाबीन - ग्लाइसिन मैक्स
कुल - लेग्यूमिनेसी या फेबेसी

85.सरसों  - ब्रेसिका स्पेशीज
कुल - क्रूसीफेरी (Crucifereae)

86.बजरा - पेनीसेटम अमेरिकानम
कुल - ग्रेमिनी

87. ज्वार - सोरघम बाईकलर
कुल -ग्रेमिनी या पोयसी

88.कपास - गोसीपियम स्पेशीज
कुल - मालवेसी

89. तम्बाकू - निकोटिया स्पेशीज
कुल - सोलेनेसी

90. बरसीम - ट्राइफोलियम एलेक्जेनन्ड्रिनम
कुल - लेग्यूमिनेसी

91. बरगद - फाइकस वेनगैलेंसिस
कुल - मोरेसी (moraceae)

92.संन्तरा - क्रिटरस साइनेनसीस
कुल - रूटेसी (Rutaceae)

93.लीची - लीची चाइनेसिस
कुल - सपिण्डेसी (Sapindaceae)

94.मसूर - लिनस कुलीनेरिस
कुल - फेबेसी (fabaceae)

95. लोबिया - विग्ना युनगियूइकुलाटा
कुल - फेबेसी

96.तिल - सिसामुम इण्डिकम
कुल - पेडालिएसी (pediluaceae )

97.अलसी - लाइनम यूसीटेटीसिमम
कुल - लिनेसी (linaceae)

98.आडू - प्रूनस पर्सिका
कुल - रोजेसी (Rosaceae)

99.लोकाट - इरिओट्रीया जापोनिका
कुल - रोजेसी

100.इमली - टैमेराइडस् इण्डिका
कुल - फेबेसी

101. काजू - एनाकार्डियम ओक्सीडेन्टल
कुल - एनाकार्डिएसी

102.पिस्टा - पिस्टेसिया वेरा
कुल - एनाकार्डिएसी ( Anacardiaceae)

103.बाकला - फैसेयोलस वल्गैरिस
कुल - फेबेसी
उपकुल - Faboideae)

104.कटहल - रटॉरपुस हेट्रॉफील्लुस (artocarpus heterophylla )
कुल (फॅमिली)-मोरेसी

105.जैतून  - ओलेआ एउरोपैआ
कुल - ओलिएसी (oleaceae )

106.कबिठ या कठबेल - लिमोन्या आकीदीस्सीमा ( liminia acidissima)
कुल - रूटेसी (Rutaceae)

107.रूमैक्स - रूमैक्स पेटीइनटीया
कुल - पोलीगोनेसी / polygonaceae

108.अफीम (opium) - पपबर सोम्निफेरूम(papaver sominiferum)
कुल - पपवरेसी (papaceraceae)

109.भांग - कंनबिस सेटाइवा( connbis sativa)

फैमिली - कंनबेसी

110.सुपारी - ऐरेका कैटेचु
कुल - ऐरेकेसी

111.कद्दू - कुकुरबिटा मोस्कैटा
कुल - कुकुबिटेसी

112.कुंदूर -  कॉक्सीनिया कॉर्डिफोलिया
कुल -

113.लौकी - लेजेनेरिया साइसेरिया
कुल - कुकुबिटेसी

114.खूबानी - प्रूनस अर्मेनिका
कुल - रोजेसी

पोषक तत्वों की कमी के कारण

1.नाइट्रोजन -

पौधों की बढवार रुक जाती है! तथा तना छोटा एवं पतला हो जाता है पत्तियां नोक  की तरह से पीली पड़ने लगती हैं!
यह प्रभाव पहले पुरानी पत्तियों पर पड़ता है तथा नई पत्तियां बाद में पीली पड़ती है

पौधों में टिलरिंग कम होती है फूल कम या बिल्कुल नहीं लगते हैं
फूल एवं फल गिरना प्रारंभ कर देते हैं दाने कम बनते हैं आलू का विकास घट जाता है!

2.फास्फोरस - (१) पौधों की वृध्दि कम हो जाती है तथा जड़ों का विकास भी  कम हो जाता है !

और पत्तियों का रंग गहरा हरा तथा किनारे कहरदार हो जाते हैं !

(२)पुरानी पत्तियां शेरों की तरह से सूखना शुरु कर देती है तथा उनका रंग तावे जैसा या बेगनी हरा हो जाता है !

(३)टिलरिंग घट जाती है!

(४) फल कम लगते हैं दोनों की संख्या भी कम  जाती है !

(५) अधिक कमी होने पर तना गहरा पीला पड़ जाता है !

3.पोटाश - (१)  पौधों में ऊपर की कालिकाओं की वृद्धि रुक जाती है !

(२) पत्तियां छोटी पतली व सिरो की  तरफ सूखकर  भूरी पड़ जाती है!
और मुड़ जाती हैं!

(३) पुरानी पत्तियां किनारो और सिरो पर झुलसी  हुई दिखाई पड़ती है!

तथा कई किनारों से सुखना प्रारंभ कर देती हैं!

तथा  किल्ले बहुत अधिक निकलते हैं !

(४) तने कमजोर हो जाते है! ओर  फल तथा बीज पूर्ण रूप  से विकसित नहीं हो पाते हैं तथा इनका आकार  छोटा सिकुड़ा हुआ एवं रंग हल्का हो जाता है !

(५) पौधों पर रोग लगने की संभावना अधिक होती है!

4.कैल्शियम - नए पौधों की पत्तियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं !
ये प्राय: छोटी और असामान्यता गहरे हरे रंग की हो जाती हैं !

पत्तियों का अग्रभाग हुक के आकार का हो जाता है पत्तियों को देखकर इस तत्व की कमी आसानी से पहचानी  जा सकती है !

जड़ो  का विकास बुरी तरह प्रभावित होता है और जड़े सड़ने लगती लगती है !

अधिक कमी की दशा में पौधों की शीर्ष  कलिकाएं (वर्धनशील अग्रभाग ) सूख जाती हैं कलिकाएं और पुष्प परिपक्त अवस्था में गिर जाते हैं !

तनों की संरचना कमजोर हो जाती है

5.मैग्नीशियम - पुरानी पत्तियां किनारों और सिरो  से एवं मध्य भाग से पीली पड़ने लगती है!

तथा अधिक कमी की स्थिति से प्रभावित पत्तियां सूख जाती हैं ! और गिरने लगती हैं! पत्तियां आमतौर पर छोटी तथा अंतिम अवस्था में कड़ी हो सकती हैं और किनारों से अंदर की ओर मुड़ जाती हैं !

कुछ सब्जी वाली फसलों में नसों के बीच पीले धब्बे बन जाते हैं ! और अंत में संतरे के रंग के लाल और गुलाबी रंग के चमकीले धब्बे  बन जाते हैं !

टहनियां  कमजोर होकर फफूंद जनित रोग के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं! साधारणता परिपक्त पत्तियां गिर जाती हैं!

6.गन्धक - नई पत्तियां एक साथ पीले हरे रंग की हो जाती हैं तने की वृद्धि रुक जाती है!

तना सक्त  लकड़ी जैसा पतला हो जाता है !

7.जस्ता - जस्ते  की कमी के मुख्य लक्षण पौधों के उपरी भाग से दूसरी या तीसरी पूर्ण परिपक्त पत्तियों से प्रारंभ होते हैं!